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पत्रकार कहता रहा कि मैं प्रेस से हूं, एसडीएम ने छीनी डायरी और पुलिस ने पकड़ा कॉलर, भरी भीड़ में पत्रकार को उठा कर ले गए साहब और उनकी फ़ौज

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बनकिम दास (राँची)

धनबाद/ 15 नवंबर यानि स्थापना दिवस की घटना गवाह है कि सरकार और प्रशासन प्रेस को कितना तवज्जो देता है, दौड़ा-दौड़ा कर मीडिया के लोगों को पीटा जाता है और सरकार की तरफ से एक शब्द भी इस वारदात को लेकर जारी नहीं किया जाता, जबकि रांची के मोरहाबादी मैदान में बकायदा प्रशासन ने पास जारी कर पत्रकारों को बुलाया था। पत्रकारगण उस पास को गर्दन में शान से लगा कर कवरेज करने की कोशिश कर रहे थे और पिट रहे थे, निंदा, भ्रत्सना, शिकायत और विरोध भी हुआ। लेकिन किसी तरह की कोई कार्रवाई पत्रकारों पर लाठी भांजने वाले पुलिसवालों और प्रशासन पर नहीं हुई।

ऐसे में रघुवर सरकार के प्रशासन की हिम्मत अब इतनी बुलंद है कि कहीं भी और किसी भी बाहने को लेकर पत्रकार पिट रहे हैं, भरी भीड़ के बीच उठा लिए जा रहे हैं, उनसे मोबाइल छीन कर सारा डीटेल डीलीट कर किया जा रहा है और बाद में शायद दिखावे के लिए सॉरी बोला जा रहा है।

एसडीएम की सफाई, संदिग्ध लग रहा था वो

वीडियो देखने के बाद यह साफ हो जाता है कि कैसे एसडीएम की फौज पत्रकार के साथ जबसदस्ती कर रही है, वो बार-बार बोल रहा है कि वो प्रेस से है, लेकिन एसडीएम उसकी डायरी को उसके हाथ से छीन लेते हैं। अपनी फौज को कहते हैं कि पत्रकार को हिरासत में ले लो बाद में पूछे जाने पर एसडीएम राज महेश्वरम कहते हैं कि हमने पत्रकार से आइडी मांगी, पूछ-ताछ की।

लेकिन वीडियो सारे सच को बयां कर रहा है। ना तो पत्रकार से पूछताछ हुई। ना ही पत्रकार को इतना मौका दिया गया कि वो अपनी पहचान पत्र या अपने किसी सीनियर से प्रशासनिक अधिकारी की बात करा सके। बस अतिक्रमण हटाने के बहाने एसडीएम साहब ने अपनी हुनर से ज्यादा अपने पावर का इस्तेमाल किया।

एसडीएम साहब बताएं ! किस धारा के तहत वीडियोग्राफी अपराध है।

ऐसा शायद ही कोई कानून संसद में पास हुआ हो जिसमें कहा गया हो कि किसी अतिक्रमण हटातो वक्त वीडियोग्राफी करना मना हो, एक आम आदमी भी चाहे तो पूरे मामले की वीडियोग्राफी कर सकता है। लेकिन एसडीएम राज महेश्वरम ने एक पत्रकार को भरी बाजार में धक्का-मुक्की कर बस इसलिए उठा लिया कि वो वीडियोग्राफी कर रहा था एसडीएम से न्यूज विंग ने बात की, उनके पास कोई माकूल जवाब देने को नहीं था, आखिर में उनहोंने सॉरी बोला है। लेकिन सवाल यह है कि गलत खबर छाप कर मीडिया भी सॉरी बोलने लगे तो क्या गलती माफ की जाएगी।


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