पैक्स घोटाला : आमस प्रखंड के पैक्स में हो रहा है करोड़ों का घोटाला

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आमस : गया जिला के आमस प्रखंड में किसानों का हाल बेहाल है और पैक्स अध्यक्ष मालामाल हो रहे है, पैक्सअध्यक्ष खुल के किसानों को बोलते है की ऊपर से निचे तक घुस लेता है , कोई भी पैक्स घर से नहीं देगा किसानो से लेकर ही देगा।

पैक्स किसानो के सहायता के लिए काम करती है और किसानों को सभी प्रकार के फसल के लिए आर्थिक, उर्वरक और उपकरण में सहायता देने के लिए बनाया गया है। लेकिन पैक्स किसानों के लिए अभिशाप बन गया है क्यों की पैक्स सौ फीसदी भष्ट्राचार का भेंट चढ़ा हुआ है।
आमस प्रखंड में पैक्स भ्रष्ट्राचार परवान पर चढ़ा हुआ है। इस प्रखंड में मात्र सात पंचायत है और  प्रखंड के सभी अधिकारी और कर्मचारी  किसान धान खरीदी मांमले में सभी संलिप्त है।

किसानो से बात चित करने पर उनहोने बताया की आमस के किसान बहुत मजबूर है , क्यों की सभी छोटे कर्मचारी से लेकर जिला के बड़े अधिकारी के साथ साथ जिला अधिकारी को भी पैक्स अध्यक्ष द्वारा रिश्वत दिया जाता है। प्रखंड कार्यालय का भी यही हाल है सभी को कमीशन लोट वाइज मिलते रहता है और मनमानी तरिके काम होते रहता है।

आमस प्रखंड में 753 किसानों से लगभग 4381 मीट्रिक टन धान की खरीदी हो चूका है और अभी जारी है। 4381 मीट्रिक टन का मूल्य 19 रुपया 40 पैसे प्रति किलो  के अनुसार लगभग 8 करोड़ 40 लाख होता है।  उपरोक्त धान खरीदी के अनुसार प्रखंड में लगभग 42 लाख रुपयों ढलता कटा गया है जो प्रति पंचायत का औसत ढलता लगभग 6 लाख रु है।

आपको बता दूँ की लगभग 90 प्रतिशत से अधिक किसान पैक्स अध्यक्ष के रिश्तेदार और करीबी होते है। सभी का आवेदन जो किया गया है उसमे सारा का सारा जमीन का विवरण गलत डाला हुआ

है। ये सभी फ़र्ज़ी आवेदन पर फ़र्ज़ी तरिके से असली रुपयों का ट्रांसेक्शन किया जाता है।
असली किसानों के साथ 5 किलो प्रति क्विंटल ढलता कटा जाता है। मूल्य भी 16 से 17 रूपये प्रति किलो का दिया जाता है। किसी भी असली किसान को समय पर उसका रुपया चुकता नहीं किया जाता है और महीनो परेशान किया जाता है जिससे किसान तंग होकर खुले बाजार में धान बेचने को मजबूर हो जाते है और बेच भी रहे है।

आमस प्रखंड में लगभग 103 राजस्व गॉव में लगभग दस हज़ार किसान पीएम किसान योजना का लाभ ले रहे है लेकिन ये सभी किसान पैक्स की भष्ट्राचार से परेशान होकर अपनी धान को पैक्स में बेचने के स्थान पर खुले बाजार में कूड़े के भाव बेच देते है । खुले बाजार में धान 11 रूपये बिकना पैक्स का भाराष्ट्राचार का सबसे बड़ा साबुत है। सभी पैक्स और फ़र्ज़ी  किसानों की जाँच गहनता से होनी चाहिए लेकिन क्यों जिलाधिकारी सुध नहीं ले रहे है, ये तो जिलाधिकारी ही बताएँगे।

 

 

 

 

 


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