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बच्चा, भूख और मिठाई – राजेश बैरागी

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चोरी के मामलों में बच्चों के प्रति पुलिस और समाज का व्यवहार कैसा होना चाहिए? यदि चोरी भूख को मिटाने के लिए की गई है तो बच्चे के विरुद्ध रिपोर्ट लिखाने से पहले क्या ठंडे दिमाग से हालात पर विचार नहीं किया जाना चाहिए?

नालंदा(बिहार) की किशोर न्याय परिषद ने एक किशोर द्वारा मुंहबोली मामी के घर से मिठाई चोरी के मामले में आरोपी बनाए गए एक किशोर को चोरी का दोषी मानते हुए भी आरोप मुक्त कर दिया। किशोर न्याय परिषद के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मानवेंद्र मिश्रा ने किशोर के इस अपराध को बाल सुलभ कृत्य माना। किशोर के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि बच्चे के माता-पिता बीमार रहते हैं, घर में आय का कोई साधन नहीं है, किशोर अपनी ननिहाल आया हुआ था जहां वह पड़ोस की मामी के यहां चला गया और भूखा होने के कारण उसने वहां फ्रिज में रखी मिठाई निकाल कर खा ली। अदालत ने इस मामले में रिपोर्ट लिखाने वाली उस महिला व रिपोर्ट लिखने वाले संबंधित थाना की पुलिस को बच्चों के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत करने से पहले अपराध की गंभीरता पर विचार करने की नसीहत दी। अदालत ने किशोर के मूल जनपद आरा की जिला बाल संरक्षण इकाई को बच्चों की देखभाल योजना में शामिल कराकर उसे अपराध से बचाने का निर्देश भी दिया। दिलचस्प यह है कि किशोर अदालत ने इस मामले को कृष्ण की माखन चोरी की बाल लीला के समान माना।

दरअसल भारत में कुल पंजीकृत होने वाले अपराधिक मामलों में बाल अपराधियों की संख्या एक प्रतिशत ही है। तो भी भीख मांगने वाले बच्चों से लेकर ठक-ठक गैंग तक बाल अपराधियों की एक बड़ी संख्या अपराध में लिप्त है।भूख, गरीबी, परिस्थितियां और प्रवृत्ति के चलते फुटपाथ से लेकर महलों तक के बाल-किशोर अपराधों में लिप्त पाए जाते हैं। बच्चों के खुद अपराध की ओर प्रवृत्त होने से ज्यादा गंभीर बात उन्हें अपराध की दुनिया में आसानी से धकेले जाने की है। जरायमपेशा करने वाले अनेक लोग अपने धंधे को चलाने के लिए बच्चों का इस्तेमाल करते हैं। आतंकी तक बच्चों के माध्यम से अपने उद्देश्य को अंजाम दे रहे हैं। हालांकि ऐसे कोई आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं कि अपराध सिद्ध कितने बाल या किशोर अपराधियों का पुनर्वास किया गया है और कितने बाल अपराधी सुधरे ही नहीं। ऐसे में नालंदा किशोर न्याय परिषद का एक बच्चे की गलती को क्षमा करना किसी मानवता से कम नहीं है।(नेक दृष्टि हिंदी साप्ताहिक नौएडा)


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Shiv Chandra
Journalist Shiv Chandra
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